गुरमत कैंप का चौथा दिन: बच्चों ने संभाली अरदास और हुकमनामे की सेवा, स्टेज पर दिखा अद्भुत आत्मविश्वास

इशप्रीत कौर और चंचल कौर ने निभाई मुख्य सेवा; अमृतमई कीर्तन से गुंजायमान हुआ गुरुद्वारा साहिब

भोपाल | ईदगाह हिल्स स्थित गुरुद्वारा गुरु नानक टेकरी साहिब में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा आयोजित 7 दिवसीय गुरमत शिक्षा कैंप के चौथे दिन गुरुवार को बच्चों के भीतर एक अद्भुत आध्यात्मिक और व्यावहारिक बदलाव देखने को मिला। कैंप के दौरान न सिर्फ बच्चों ने उच्च धार्मिक शिक्षा ग्रहण की, बल्कि गुरुद्वारा साहिब की मुख्य स्टेज पर जाकर धार्मिक सेवाओं का सफल संचालन भी किया।
कैंप के चौथे दिन की शुरुआत अमृतमई बाणी के रसमय कीर्तन और गुरबाणी विचारों के साथ हुई। सबसे खास बात यह रही कि आज गुरुद्वारा साहिब में होने वाली मुख्य अरदास और मुखवाक हुकमनामा लेने की अत्यंत पवित्र सेवा कैंप के बाल संतों इशप्रीत कौर एवं चंचल कौर द्वारा पूरी मर्यादा और शुद्ध उच्चारण के साथ निभाई गई। बच्चों को इस रूप में सेवा करते देख वहां उपस्थित प्रबंधन और शिक्षक भावविभोर हो गए।
अमृतसर से विशेष रूप से पधारे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी SGPC के प्रचारक ज्ञानी बलदेव सिंह जी ने आज के विशेष सत्र में बच्चों को अलग-अलग प्रकार की दस्तारों पगड़ियों की शैलियों के बारे में विस्तार से बताया। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों को सिख रहत मर्यादा के अंतर्गत जन्म संस्कार और आनंद संस्कार सिख विवाह पद्धति की संपूर्ण व व्यावहारिक जानकारी दी, ताकि बच्चे अपनी सामाजिक व धार्मिक मर्यादाओं को समझ सकें।
गुरु इतिहास की कक्षा में आज बच्चों को शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह और उनके महान सेनापति भाई हरी सिंह नलवा के स्वर्णिम इतिहास के बारे में पढ़ाया गया। बच्चों को बताया गया कि कैसे इन महान सिख योद्धाओं ने कंधार, काबुल और अफगानिस्तान जैसे दुर्गम क्षेत्रों पर अपने पराक्रम से पूरे 50 वर्षों तक खालसा राज कायम रखा था। इसके अलावा स्थानीय शिक्षकों द्वारा बच्चों को गुरमुखी लिपि की लिखाई और पढ़ाई की सेवा भी निरंतर दी गई।
शाम 4 से 5 बजे के सत्र में बच्चों को आत्मरक्षा के लिए अनिवार्य शस्त्र विद्या ‘गतका’ का कड़ा अभ्यास कराया गया। चूंकि कैंप के पांचवें दिन विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन होना है, इसलिए शिक्षकों ने बच्चों को उसकी विशेष तैयारी भी करवाई। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा बच्चों की संपूर्ण दिनचर्या के अनुसार सुबह से लेकर शाम तक उत्कृष्ट भोजन व लंगर की व्यवस्था की गई, जिसके उपरांत चौथे दिन के कैंप का समापन हुआ।

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