अमृत और अमृतवेले का महत्व समझकर बच्चों ने सीखे आत्मरक्षा के गुर : दस्तार सजाने की कला और सिख मार्शल आर्ट गतका का रहा उत्साह

भोपाल | ईदगाह हिल्स स्थित गुरुद्वारा गुरु नानक टेकरी साहिब में संचालित 7 दिवसीय ‘गुरमत शिक्षा कैंप’ के तीसरे दिन बुधवार को बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ गुरमत ज्ञान और सिख इतिहास की गौरवशाली शिक्षा प्राप्त की। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से मजबूत करने के लिए चल रहे इस कैंप में आज बच्चों को वैचारिक रूप से दृढ़ बनाने और आत्मरक्षा के गुर सिखाने पर विशेष जोर दिया गया।
कैंप के मुख्य बौद्धिक सत्र में सिखों के पांचवें गुरु, श्री गुरु अर्जन देव जी के जीवन सिद्धांतों और उनकी अद्वितीय शहादत की गाथा विस्तार से पढ़ाई गई। बच्चों को बताया गया कि किस प्रकार मुगल सम्राट जहांगीर के राज में भीषण जुल्म के आगे न झुकते हुए उन्होंने शहादत स्वीकार की। उल्लेखनीय है कि इसी माह 18 जून को गुरु साहिब का शहीदी पूरब भी श्रद्धापूर्वक मनाया जाना है। इसके साथ ही, सिख इतिहास के एक अन्य काले अध्याय सन 1984 जून में सिखों पर हुए अत्याचार और ‘साका नीला तारा’ ऑपरेशन ब्लू स्टार के ऐतिहासिक संदर्भों से ज्ञानी बलदेव सिंह जी ने बच्चों को रूबरू कराया।
सिक्खी सिद्धांतों की कक्षा में बच्चों को जीवन में ‘अमृत का महत्व’ और आध्यात्मिक उन्नति के लिए ‘अमृतवेले सुबह का समय का महत्व’ गहराई से समझाया गया। इसके साथ ही ‘दस्तार’ पगड़ी पहनने की कला का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। संगीत के सत्र में बच्चों को रागमयी कीर्तन की तर्ज पर सरगम, सुर और ताल का अभ्यास कराया गया, क्योंकि कल होने वाले विशेष दीवान में स्टेज पर कीर्तन, अरदास और हुकमनामा साहिब पढ़ने जैसी सभी मुख्य सेवाओं की कमान इन्हीं बच्चों द्वारा संभाली जाएगी।
कैंप के अंतिम सत्र में पारंपरिक सिख मार्शल आर्ट ‘गतका’ के जरिए बच्चों को आत्मरक्षा Self-Defense के गुर सिखाए गए। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, गुरुद्वारा नानकसर के पदाधिकारियों के अनुसार, बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि स्टेज संचालन, अरदास और हुकमनामा आदि सभी विधाओं में पूरी तरह आत्मनिर्भर और अभ्यस्त बनाने के लिए यह विशेष व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जा रही है।