अब बिना लिखित कारण बताए नहीं होगी गिरफ्तारी: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय का सख्त परिपत्र; उल्लंघन पर अधिकारी होंगे जिम्मेदार

भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय के अपराध अनुसंधान विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए सभी पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों को महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया है। इसके तहत अब किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी के दौरान पारदर्शिता बरतना और गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में बताना अनिवार्य कर दिया गया है।

उच्चतम न्यायालय द्वारा महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य से जुड़े एक मामले में दिए गए आदेश के अनुसार, अब पुलिस को गिरफ्तारी के ठोस कारणों का लिखित विवरण अभियुक्त को देना होगा। केवल मौखिक जानकारी देना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। परिपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि गिरफ्तारी के आधार स्थानीय भाषा या ऐसी भाषा में दिए जाएं, जिसे गिरफ्तार व्यक्ति आसानी से समझ सके।

नए निर्देशों के अनुसार, गिरफ्तारी के लिखित कारण या तो गिरफ्तारी के समय ही दिए जाएंगे या फिर अभियुक्त को मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करने से कम से कम 2 घंटे पूर्व उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया का उल्लेख गिरफ्तारी पंचनामा एवं संबंधित अभिलेखों में दर्ज करना भी जरूरी होगा। यह निर्देश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 47 के अनुरूप जारी किए गए हैं।

परिपत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निर्देशों का पालन नहीं करने पर गिरफ्तारी को अवैध माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित पुलिस अधिकारी के विरुद्ध न्यायालय की अवमानना या विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, अभियुक्त को तत्काल रिहाई का कानूनी अधिकार भी प्राप्त होगा।

पुलिस मुख्यालय ने सभी इकाइयों को निर्देशित किया है कि इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि कानून के साथ-साथ नागरिकों के मौलिक अधिकारों की भी पूर्ण रक्षा हो सके।

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