विश्व राजनीति के शोर के बीच भारत की संयमित कूटनीति – डॉ. राघवेंद्र शर्मा

हमारे विद्वानों ने सदियों पहले ही चेताया था— “बिना विचारे जो करे, सो पाछे पछताय।” अर्थात…