अपराध की सूचना से अंतिम न्याय तक की प्रक्रिया दिखाई, नवीन न्याय संहिताओं की प्रदर्शनी का समापन

डीजीपी कैलाश मकवाणा ने किया अवलोकन, 14 जोन में दिखी आधुनिक पुलिसिंग और फॉरेंसिक तकनीक

भोपाल। भेल दशहरा मैदान, गोविंदपुरा में नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित पांच दिवसीय भव्य प्रदर्शनी का समापन हुआ। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने प्रदर्शनी के विभिन्न जोन का अवलोकन किया और अपराध की सूचना से लेकर पुलिस कार्रवाई, वैज्ञानिक अनुसंधान, फॉरेंसिक जांच, अभियोजन और न्यायालयीन प्रक्रिया तक की पूरी व्यवस्था को एक मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत करने की सराहना की।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित प्रदर्शनी में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) को 14 विशेष जोन में मॉडल, डिजिटल डिस्प्ले, वीडियो, लाइव डेमो और सजीव नाट्य मंचन के जरिए समझाया गया। अंतिम दिन अभियोजन और न्यायालय चरण का विशेष मंचन हुआ, जिसमें CCTNS और ICJS सहित डिजिटल प्रणालियों की भूमिका दिखाई गई।

प्रदर्शनी में पुलिस से लेकर न्यायालय तक ‘एंड-टू-एंड’ डिजिटल न्याय प्रक्रिया को भी प्रदर्शित किया गया। CCTNS, e-साक्ष्य, e-Prosecution, MedLEaPR, e-Forensics, e-Prisons और e-Courts के माध्यम से विभिन्न चरणों में तकनीक के उपयोग और आपसी समन्वय की जानकारी दी गई। NAFIS और MCU के जरिए फिंगरप्रिंट, पामप्रिंट, आइरिस स्कैन और अन्य बायोमेट्रिक पहचान की प्रक्रिया भी समझाई गई।

3डी क्राइम सीन मॉडल के जरिए घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने, फॉरेंसिक जांच और e-Forensic 2.0 की कार्यप्रणाली दिखाई गई। वहीं डायल-112, साइबर सुरक्षा, 1930, E-Zero FIR, ‘ऑपरेशन मुस्कान’ और महिला हेल्प डेस्क की व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी गई।

पांच दिनों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, युवाओं और नागरिकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। लाइव क्विज सहित विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्हें आधुनिक पुलिसिंग, फॉरेंसिक विज्ञान और न्याय प्रक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला। डीजीपी मकवाणा ने पुलिस, फॉरेंसिक, चिकित्सा, अभियोजन, न्यायिक प्रक्रिया और जेल प्रशासन के समन्वित स्वरूप को प्रदर्शनी की महत्वपूर्ण विशेषता बताया।

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