न्याय और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस की पहल — ‘संबल-2026’ फोरम आयोजित

समाज की सहभागिता और मानवीय दृष्टिकोण से ही प्रभावी होगी पुलिसिंग : डीजीपी कैलाश मकवाणा

भोपाल। न्याय तक आमजन की पहुँच को सुलभ बनाने और सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस के सामुदायिक पुलिसिंग विंग द्वारा दो दिवसीय ‘संबल-2026 : सोशल वर्क एंड कम्युनिटी पुलिसिंग फोरम’ का आयोजन 10 एवं 11 मार्च को भोपाल में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भोपाल स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के समाज कार्य विभाग, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष तथा कोडी इंस्टीट्यूट के सहयोग से किया गया।

इस फोरम के माध्यम से पुलिस, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और नागरिक समाज संगठनों को एक साझा मंच मिला, जहाँ न्याय व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल संरक्षण, साइबर अपराध और नशा मुक्ति जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम के प्रारंभ में ‘सृजन’ संस्था के बच्चों द्वारा प्रेरक पावर वॉक प्रस्तुत की गई, जिसमें समाज में बेटियों की सशक्त भूमिका का संदेश दिया गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से साइबर अपराध से बचाव, नशा मुक्ति, महिला सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर प्रभावी संदेश दिया। भोपाल स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के प्राचार्य डॉ. फादर जॉन पी. जे. ने स्वागत उद्बोधन देते हुए सामाजिक कार्य और पुलिसिंग के बीच समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा समाज में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से साइबर अपराध और मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव के विरुद्ध लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में चलाए गए साइबर जागरूकता अभियान तथा ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान को व्यापक जनसहभागिता मिली और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना प्राप्त हुई।

उन्होंने बताया कि ‘मुस्कान अभियान’ के अंतर्गत वर्ष 2025 में विशेष प्रयासों से 14 हजार से अधिक लापता बालिकाओं को खोजकर उनके परिजनों से मिलाया गया, जो मध्यप्रदेश पुलिस की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग के दौरान कानून के साथ-साथ संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण भी उतना ही आवश्यक है।

डीजीपी ने अपने सेवा अनुभवों के तीन महत्वपूर्ण प्रसंग साझा करते हुए बताया कि कई मामलों में निष्पक्ष जांच और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने से न्याय सुनिश्चित किया जा सका। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को नियमों का पालन करते हुए मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्य करना चाहिए।

इस अवसर पर ‘संबल’ से संबंधित पुस्तक का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के समापन सत्र को राज्य नीति आयोग के सदस्य ऋषि गर्ग (आईएएस), खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संचालक अंशुमान यादव (आईपीएस) तथा नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी भोपाल के कुलपति प्रो. (डॉ.) एस. सूर्य प्रकाश ने संबोधित किया और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया।

इस दौरान पुलिस आयुक्त संजय कुमार (आईपीएस) ने अपने संबोधन में नक्सल प्रभावित क्षेत्र बालाघाट में कार्य करने के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से समाज का विश्वास अर्जित करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

डीआईजी सामुदायिक पुलिसिंग डॉ. विनीत कपूर ने दो दिवसीय कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में हुई चर्चाओं और प्राप्त सुझावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस फोरम का उद्देश्य पुलिस, सामाजिक कार्य संस्थाओं और अकादमिक जगत के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करना है।

कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की प्रतिनिधि कल्पना यादव ने फोरम से प्राप्त प्रमुख सिफारिशों और निष्कर्षों को प्रस्तुत किया। वहीं कोडी यूनिवर्सिटी की डॉ. सारिका सिन्हा ने समुदाय, सामाजिक कार्य और पुलिसिंग के बीच समन्वय के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े न्यायिक निर्णयों और नवाचारों पर भी चर्चा हुई। रचना त्यागी ने बताया कि महिला और बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशील दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है तथा पोक्सो मामलों में पीड़ित बच्चों के समर्थन के लिए सपोर्ट पर्सन और पैरालीगल वॉलंटियर्स की व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

फोरम में वर्ष 2019 में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो और अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन के बीच हुए समझौते का भी उल्लेख किया गया, जिसके माध्यम से लापता और शोषित बच्चों की पहचान और बचाव के लिए तकनीकी सहयोग को मजबूत किया गया है।

इस अवसर पर सामुदायिक पुलिसिंग में उत्कृष्ट कार्य के लिए टीआई अवधेश तोमर (थाना गोविंदपुरा), टीआई सरस्वती (थाना छोला), टीआई अंजना धुर्वे (बैतूल), टीआई निरुपा (थाना कमला नगर), एएसआई सोनिया पटेल (थाना बागसेवनिया) तथा प्रधान आरक्षक सुनंदा चौधरी (थाना हबीबगंज) को पुलिस महानिदेशक द्वारा सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले कई ग्रासरूट चेंजमेकर्स को भी सम्मानित किया गया। फोरम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 150 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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