मध्य प्रदेश शासन द्वारा प्रस्तुत बजट का अवलोकन करने पर स्पष्ट होता है कि सरकार ने अधोसंरचना विकास, औद्योगिक निवेश, कृषि प्रोत्साहन तथा लघु एवं मध्यम व्यापार को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया है। सड़क, परिवहन और लॉजिस्टिक नेटवर्क को सुदृढ़ करने, औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार तथा वेयरहाउसिंग सुविधाओं में वृद्धि से प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। इससे लागत में कमी आएगी और बाजारों की आपूर्ति व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी।
एमएसएमई, स्टार्टअप और स्वरोजगार योजनाओं के लिए बजट में प्रावधान किया जाना सकारात्मक पहल है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ तभी संभव है जब बैंकिंग प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और छोटे व्यापारियों को सहजता से ऋण उपलब्ध हो। वर्तमान में लघु व्यापारी दस्तावेजी प्रक्रियाओं और अनुमतियों की जटिलताओं से जूझ रहे हैं, अतः बजट प्रावधानों के साथ प्रक्रियात्मक सरलीकरण भी आवश्यक है।
शहरों के पारंपरिक और स्थापित बाजारों की समस्याएं अभी भी गंभीर हैं। अतिक्रमण, पार्किंग की कमी, यातायात अव्यवस्था तथा ग्राहकों के लिए मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण व्यापार प्रभावित होता है। बजट में शहरी विकास के लिए किए गए प्रावधानों से अपेक्षा है कि बाजार पुनर्विकास, सुव्यवस्थित पार्किंग, लोडिंग-अनलोडिंग व्यवस्था और सुरक्षा सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ छोटे व्यापारियों को तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल भुगतान पर प्रोत्साहन और कर अनुपालन को सरल बनाने की आवश्यकता है, ताकि वे आधुनिक प्रतिस्पर्धा में सक्षम बन सकें। ऑनलाइन व्यापार की बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए पारंपरिक व्यापार के संरक्षण के लिए व्यावहारिक नीतिगत समर्थन भी अपेक्षित है।
समग्र रूप से यह बजट विकासोन्मुखी और संभावनाओं से परिपूर्ण है, किंतु इसकी सफलता प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। यदि सरकार स्थानीय व्यापारिक ढांचे को सुदृढ़ करने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और छोटे व्यापारियों को वास्तविक राहत देने की दिशा में ठोस कदम उठाती है, तो प्रदेश का व्यापारिक वातावरण और अधिक सशक्त होगा।
– विवेक साहू
महामंत्री, भोपाल किराना व्यापारी महासंघ
पूर्व प्रवक्ता, कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)