17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे नरेंद्र मोदी 76 वर्ष के हो गए हैं। प्रधानमंत्री के रूप में उनका सार्वजनिक जीवन अब उस मुकाम पर है, जहां उनकी यात्रा को केवल राजनीतिक घटनाक्रमों के माध्यम से नहीं, बल्कि पिछले करीब ढाई दशकों में शासन, जनकल्याण, अर्थव्यवस्था, तकनीक, सुरक्षा, कूटनीति और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका में आए बदलावों के संदर्भ में भी देखा जा सकता है।
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लंबे कार्यकाल के बाद 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी ने 2024 में लगातार तीसरी बार केंद्र की सरकार का नेतृत्व संभाला। इस लंबी यात्रा के बीच एक विचार लगातार उनके राजनीतिक विजन के केंद्र में दिखाई देता है—’सेवा’ को शासन का माध्यम बनाना और भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का दीर्घकालिक लक्ष्य।
प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों को सामने रखते हुए 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक मध्यप्रदेश में ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है। इसके तहत रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, सेवा कार्य, प्रदर्शनियां, संवाद और जनसंपर्क जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचने का कार्यक्रम बनाया गया है। यह अभियान प्रधानमंत्री के ‘सेवा और समर्पण’ के सार्वजनिक संदेश को जनभागीदारी से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
‘सबका साथ, सबका विकास’ से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच
मोदी सरकार के कार्यकाल की एक प्रमुख विशेषता योजनाओं को बड़े पैमाने पर लागू करने और अंतिम छोर तक लाभ पहुंचाने पर जोर रही है। पिछले वर्षों में लगभग 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए। इसी अवधि में करोड़ों परिवारों को पक्के घर, स्वच्छ ईंधन, शौचालय, नल का पानी, मुफ्त खाद्यान्न और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी सुविधाओं से जोड़ा गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ही मार्च 2026 तक 4.15 करोड़ घर आवंटित, 3.90 करोड़ स्वीकृत और 2.99 करोड़ घर पूर्ण होने की जानकारी सरकारी आंकड़ों में दी गई है।
यानी गरीब कल्याण की राजनीति केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि घर, पानी, गैस, शौचालय, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों तक पहुंचे—यह मोदी सरकार के शासन मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
12 करोड़ से अधिक शौचालय और स्वच्छता का जनआंदोलन
स्वच्छ भारत मिशन को मोदी सरकार की सबसे व्यापक जनभागीदारी वाली पहलों में गिना जाता है। अगस्त 2026 तक 12.19 करोड़ से अधिक व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बनाए जा चुके थे। भारत को 2019 में खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया और इसके बाद अभियान का फोकस ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन तथा ODF Plus मॉडल की ओर बढ़ा।
इस अभियान का महत्व केवल शौचालय निर्माण तक सीमित नहीं रहा। स्वच्छता को सरकारी कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन के अभियान के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया गया।
हर घर नल से जल: सुविधा से सम्मान तक
जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को पाइप से पानी पहुंचाने की दिशा में भी बड़े पैमाने पर काम हुआ। अगस्त 2019 में जहां करीब 3.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों के पास नल कनेक्शन था, वहीं अगस्त 2026 तक यह संख्या 15.91 करोड़ से अधिक पहुंच गई। महिलाओं के जीवन में इसका महत्व विशेष है। घर तक पानी पहुंचने से पानी लाने में लगने वाला समय और श्रम कम होता है और ग्रामीण परिवारों के जीवन में सुविधा बढ़ती है।
उज्ज्वला: रसोई से जुड़ी एक बड़ी सामाजिक पहल
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने करोड़ों महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अगस्त 2026 तक 10.57 करोड़ से अधिक मुफ्त LPG कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके थे। इस पहल को महिला स्वास्थ्य, घरेलू सुविधा और स्वच्छ ऊर्जा के व्यापक लक्ष्य से जोड़कर देखा जा सकता है।
80 करोड़ से अधिक लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा
कोविड महामारी के बाद पैदा हुई आर्थिक परिस्थितियों में गरीब परिवारों की खाद्य सुरक्षा सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में रही। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ से अधिक लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। सरकारी आंकड़ों में 81 करोड़ से अधिक लाभार्थियों का उल्लेख है। महामारी जैसे असाधारण संकट के समय इतनी बड़ी आबादी तक खाद्यान्न पहुंचाना भारत के प्रशासनिक और वितरण तंत्र के लिए भी एक बड़ी परीक्षा थी।
कोविड काल: संकट में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास
कोविड-19 महामारी भारत सहित पूरी दुनिया के लिए अभूतपूर्व संकट थी। भारत ने इस दौरान बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया। 17 जुलाई 2022 को भारत ने 200 करोड़ कोविड वैक्सीन डोज का आंकड़ा पार किया। उस समय 200,00,15,631 डोज दी जा चुकी थीं।
इस अभियान में वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्यकर्मियों, वैक्सीन निर्माताओं और करोड़ों नागरिकों की भूमिका रही। सरकार ने महामारी के दौरान गरीब परिवारों के लिए खाद्यान्न सुरक्षा को भी जारी रखा।
आयुष्मान भारत: स्वास्थ्य सुरक्षा का विस्तार
स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष्मान भारत ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए अस्पताल में इलाज की वित्तीय सुरक्षा का विस्तार किया। जून 2026 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार आयुष्मान भारत के तहत 43.93 करोड़ हेल्थ कार्ड जारी किए जा चुके थे। इसके साथ 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के नागरिकों तक स्वास्थ्य सुरक्षा का विस्तार भी किया गया है।
महिला शक्ति: लाभार्थी से नेतृत्वकर्ता तक
मोदी सरकार के विजन में महिलाओं की भूमिका केवल कल्याणकारी योजनाओं की लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक नेतृत्व में भागीदार के रूप में भी प्रस्तुत की गई है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक अवसर, लखपति दीदी अभियान और नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी व्यापक दिशा का हिस्सा हैं।
2023 में संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया। 2026 में सरकार ने इसके क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है। यह भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पहल है।
युवाओं के लिए नए अवसरों का भारत
भारत का युवा वर्ग मोदी सरकार की विकास अवधारणा के केंद्र में रहा है। स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियानों ने युवाओं को उद्यमिता, कौशल, तकनीक, खेल और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया है। स्टार्टअप संस्कृति ने भारत में युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाले वर्ग के बजाय रोजगार और नवाचार पैदा करने वाले उद्यमियों के रूप में स्थापित करने की दिशा में नई ऊर्जा दी है।
डिजिटल इंडिया: दुनिया के सामने भारत का नया मॉडल
डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना भारत की सबसे चर्चित उपलब्धियों में से एक बन चुकी है। UPI, डिजिटल भुगतान, आधार और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी व्यवस्थाओं ने करोड़ों लोगों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा है। भारत की डिजिटल व्यवस्था अब केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है। विभिन्न देशों के साथ डिजिटल भुगतान और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में सहयोग बढ़ रहा है।
यही वह क्षेत्र है जहां भारत ने दुनिया के सामने यह दिखाया है कि बड़े पैमाने पर डिजिटल सेवाओं को कम लागत और व्यापक पहुंच के साथ कैसे लागू किया जा सकता है।
मेक इन इंडिया से आत्मनिर्भर भारत तक
‘मेक इन इंडिया’ से शुरू हुआ विनिर्माण पर जोर बाद में आत्मनिर्भर भारत के व्यापक विजन से जुड़ा। इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल निर्माण, रक्षा उत्पादन, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, नवीकरणीय ऊर्जा और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
रक्षा क्षेत्र में भी भारत ने स्वदेशी उत्पादन और तकनीकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में नीतिगत प्रयास तेज किए हैं। इसका लक्ष्य केवल आयात कम करना नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला में अधिक महत्वपूर्ण स्थान दिलाना भी है।
सुरक्षा के क्षेत्र में बदली हुई प्राथमिकताएं
राष्ट्रीय सुरक्षा मोदी सरकार के प्रमुख एजेंडों में रही है। सीमा सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई, रक्षा आधुनिकीकरण, स्वदेशी हथियार निर्माण और रणनीतिक साझेदारियों को सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक ढांचे से जोड़ा है।
आंतरिक सुरक्षा के संदर्भ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियानों के साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास परियोजनाओं पर भी जोर दिया गया है।
मध्यप्रदेश को लेकर भाजपा नेताओं और सरकार की ओर से यह दावा किया गया है कि राज्य में नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। इस दावे को स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के आधिकारिक आंकड़ों और घटनाक्रमों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
अंतरिक्ष से दुनिया तक भारत की नई पहचान
चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग, आदित्य-L1 मिशन और गगनयान जैसे कार्यक्रमों ने भारत की अंतरिक्ष क्षमता को वैश्विक चर्चा के केंद्र में रखा। अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों के लिए अवसर बढ़ाने और स्पेस इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में भी नीतिगत बदलाव हुए हैं। यह केवल वैज्ञानिक उपलब्धि का विषय नहीं है। अंतरिक्ष तकनीक संचार, मौसम, कृषि, आपदा प्रबंधन, नेविगेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ी है।
सौर ऊर्जा से हरित भविष्य की ओर
भारत ने जलवायु और ऊर्जा के क्षेत्र में भी वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाने का प्रयास किया है। International Solar Alliance और Global Biofuel Alliance जैसी पहलों के माध्यम से भारत ने स्वच्छ ऊर्जा को वैश्विक सहयोग का विषय बनाने की कोशिश की है।
देश के भीतर प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसे कार्यक्रमों के जरिए घरों की छतों पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाया गया है।
नई शिक्षा नीति से नई संभावनाएं
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय के बदलाव का रोडमैप प्रस्तुत किया। मल्टीडिसिप्लिनरी शिक्षा, मातृभाषा में सीखने, कौशल आधारित शिक्षा, तकनीक के उपयोग और उच्च शिक्षा के विस्तार पर जोर दिया गया। साथ ही मेडिकल कॉलेजों और उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या बढ़ाने के प्रयासों से उच्च शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा की क्षमता विस्तार की दिशा में बदलाव आया है।
भारत की अर्थव्यवस्था: वैश्विक शक्ति बनने की दिशा
पिछले दशक में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार तेजी से बढ़ा है और भारत आज वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में एक प्रमुख शक्ति के रूप में अपनी जगह बना चुका है। इसीलिए ‘विकसित भारत@2047’ को मोदी सरकार के सबसे बड़े दीर्घकालिक विजन के रूप में देखा जा सकता है।
दुनिया में भारत का बढ़ता कद
मोदी सरकार की विदेश नीति की एक प्रमुख विशेषता भारत की वैश्विक सक्रियता रही है। अमेरिका से लेकर यूरोप, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के देशों तक भारत ने अपने संबंधों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने की कोशिश की है।
2023 में भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को G20 का स्थायी सदस्य बनाया गया। यह Global South को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम था।
भारत ने अपनी विदेश नीति में ‘विश्व गुरु’ जैसे सांस्कृतिक विमर्श के साथ-साथ व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और विकास साझेदारी को भी महत्व दिया है।
अंतरराष्ट्रीय सम्मान और भारत की पहचान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की ओर से अब तक 36 अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इनमें सऊदी अरब का किंग अब्दुलअजीज सैश, रूस का ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू, फ्रांस का ग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर, अमेरिका का लीजन ऑफ मेरिट, भूटान का ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो, मिस्र का ऑर्डर ऑफ द नाइल और ग्रीस का ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर जैसे प्रतिष्ठित सम्मान शामिल हैं।
2025 में भी घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, ब्राजील तथा नामीबिया ने अपने सर्वोच्च सम्मानों से प्रधानमंत्री को सम्मानित किया। वहीं 2026 में नॉर्वे, स्वीडन, स्लोवाकिया, इंडोनेशिया और उज्बेकिस्तान सहित अन्य देशों ने सम्मान दिए।
ये सम्मान प्रधानमंत्री के साथ-साथ भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता और विभिन्न देशों के साथ गहरे होते संबंधों को भी रेखांकित करते हैं।
‘सेवा संकल्प’ से ‘विकसित भारत’ तक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक यात्रा को अगर एक सूत्र में पिरोने की कोशिश की जाए तो उसमें ‘सेवा’, ‘संकल्प’, ‘सुधार’, ‘सशक्तिकरण’ और ‘विकसित भारत’ जैसे विचार प्रमुख दिखाई देते हैं।
जनधन से वित्तीय समावेशन, उज्ज्वला से स्वच्छ ईंधन, स्वच्छ भारत से स्वच्छता, जल जीवन मिशन से नल का पानी, प्रधानमंत्री आवास से पक्का घर, आयुष्मान भारत से स्वास्थ्य सुरक्षा, मुफ्त खाद्यान्न से खाद्य सुरक्षा और डिजिटल इंडिया से डिजिटल सशक्तिकरण तक—सरकारी योजनाओं का एक बड़ा हिस्सा नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को केंद्र में रखता है।
(लेखक डॉ दुर्गेश केसवानी, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता हैं)